नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 7 निजी स्कूलों पर जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, फीस नियम तोड़ने पर ₹1-1 लाख का जुर्माना

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जांच में फीस नियमन अधिनियम के उल्लंघन की पुष्टि, प्रशासन ने सातों स्कूलों पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाते हुए नियमों के पालन के निर्देश दिए।

नोएडा: गौतमबुद्ध नगर में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने के मामलों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जिला शुल्क नियामक समिति (Fee Regulatory Committee) की बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूलने और शुल्क विनियमन अधिनियम का उल्लंघन करने वाले सात निजी स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

समिति की समीक्षा में पाया गया कि छह निजी स्कूलों ने शासन द्वारा निर्धारित अधिकतम 7.23 प्रतिशत की सीमा से अधिक फीस बढ़ाई। वहीं एक स्कूल ने कंपोजिट फीस के अतिरिक्त अलग से वार्षिक (Annual) शुल्क भी वसूला, जो नियमों के विपरीत है।

जिला प्रशासन के अनुसार, इससे पहले नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए 45 निजी स्कूलों को नोटिस जारी किए गए थे। जवाबों की समीक्षा के बाद सात स्कूलों को उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के उल्लंघन का दोषी पाया गया, जिसके बाद प्रत्येक पर एक लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया।

इन स्कूलों पर लगा जुर्माना

  • एपीजे स्कूल, सेक्टर-16, नोएडा
  • स्पर्श ग्लोबल स्कूल, सेक्टर-20, ग्रेटर नोएडा वेस्ट
  • रामाज्ञा स्कूल, सेक्टर-50, नोएडाविश्व भारती स्कूल, सेक्टर-28, नोएडा
  • श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल, गौर सिटी, ग्रेटर नोएडा
  • सेंट जॉन्स स्कूल, सेक्टर-2, ग्रेटर नोएडा
  • बाल भारती पब्लिक स्कूल, सेक्टर-21, नोएडा

बाल भारती पब्लिक स्कूल पर अतिरिक्त उल्लंघन

जिला प्रशासन ने बताया कि बाल भारती पब्लिक स्कूल ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 का फीस स्ट्रक्चर अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया। इसके अलावा स्कूल ने कंपोजिट फीस के अतिरिक्त अलग से वार्षिक शुल्क भी वसूला। इन उल्लंघनों को गंभीर मानते हुए स्कूल पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

प्रशासन ने दिए सख्त निर्देश

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में निजी स्कूल अधिकतम 7.23 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। इससे अधिक शुल्क वृद्धि या शुल्क विनियमन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। सभी निजी स्कूलों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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