

© रिपोर्ट : आशुतोष मिश्रा “रुद्र” – विशेष संवाददाता कानपुर
KANPUR NAGAR NIGAM NEWS : उम्र 71 साल, दोनों किडनी की बीमारी से जूझता शरीर, लेकिन हौसला आज भी जवान। पुलिस विभाग से रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर रणवीर सिंह इन दिनों अपने इलाज से ज्यादा अपने मोहल्ले की बदहाल सड़क की लड़ाई लड़ रहे हैं। दहेली सुजानपुर के भवानी नगर और आदर्श विहार की जनता के लिए वह किसी ‘भगीरथ’ से कम नहीं हैं। उनका आरोप है कि नगर निगम ने सरकारी धन से विकास का ऐसा खेल खेला है, जिसमें कागजों और शिलापट पर एक किलोमीटर सड़क बन गई, लेकिन जमीन पर करीब आधा किलोमीटर सड़क बनाकर इंजीनियर और ठेकेदार जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ गए। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये के विकास कार्य का दावा करने वाले नगर निगम ने ऐसी सड़क बनाई है, जिसने राहत देने के बजाय लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। सड़क का स्तर इतना ऊंचा कर दिया गया कि बारिश का पानी सीधे घरों में घुसने लगा। हालत यह है कि लोग अपने मकानों तक पहुंचने के लिए दरवाजों पर मिट्टी और मलबा डलवाने को मजबूर हैं।
शिलापट कुछ और कहता है, हकीकत कुछ और ?
भवानी नगर के लोगों की शिकायत के मुताबिक नगर निगम जोन-2 के अंतर्गत 15वें वित्त आयोग की धनराशि से वार्ड संख्या-47 दहेली सुजानपुर में हरिकरन चौराहे से दहेली छोटी पुलिया तक सड़क चौड़ीकरण एवं इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य फरवरी-मार्च 2026 में कराया गया। मौके पर लगे शिलापट पर पूरे एक किलोमीटर सड़क निर्माण का लोकार्पण दर्ज है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य विजय पब्लिक स्कूल तक ही सीमित रहा, जिसकी लंबाई लगभग 500 मीटर है। इसके आगे की सड़क वर्ष 2016 में बनी पुरानी सड़क ही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि पूरी सड़क नहीं बनी तो शिलापट पर एक किलोमीटर निर्माण का दावा आखिर किस आधार पर किया गया? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी अभिलेख और जमीन पर दिखाई देने वाली हकीकत में बड़ा अंतर है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
छह महीने में उखड़ने लगी सड़क, गुणवत्ता पर उठे सवाल
जिस सड़क को विकास का प्रतीक बताया गया, वह छह महीने भी टिक नहीं सकी। जगह-जगह इंटरलॉकिंग टाइल्स धंस चुकी हैं। कई स्थानों पर सड़क की सतह बैठ गई है, जिससे बारिश के दौरान गड्ढे दिखाई नहीं देते और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है, लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी की गई। यदि निर्माण सही तरीके से हुआ होता तो इतनी कम अवधि में सड़क की यह हालत नहीं होती।
एक फीट ऊंची सड़क बनी हादसों की वजह
रणवीर सिंह बताते हैं कि नई सड़क का लेवल पुरानी सड़क से करीब एक फीट ऊंचा कर दिया गया है। दोनों सड़कों के बीच समुचित समतलीकरण नहीं किया गया। बारिश में पानी भरने के बाद वाहन चालकों को ऊंचाई का अंदाजा नहीं लग पाता और आए दिन बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की व्यवस्था पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया। नालियों का ढाल बिगड़ गया और अब बरसात का पानी सड़कों पर रुकने के बजाय लोगों के घरों में घुस रहा है।
मुख्यमंत्री योगी तक पहुंची शिकायत?
जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो क्षेत्र की जनता ने एकजुट होकर शासन का दरवाजा खटखटाया। रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर रणवीर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कानपुर नगर के प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, नगर आयुक्त समेत शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सड़क निर्माण में भारी अनियमितताएं हुई हैं और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। साथ ही मांग की गई है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों, अभियंताओं और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
जनता का सवाल विकास हुआ या धन की बंदरबांट?
भवानी नगर के लोगों का कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को सुविधा देना होता है, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल उलट है। आधी सड़क, जलभराव, धंसती इंटरलॉकिंग और बढ़ते हादसों ने लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। क्षेत्रवासियों का सवाल है कि जब शिलापट पर पूरा एक किलोमीटर सड़क निर्माण दर्ज है तो बाकी सड़क आखिर कहां गई? यदि सड़क बनी ही नहीं तो सरकारी रिकॉर्ड में उसे पूरा कैसे दिखा दिया गया? लोग इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब निगाहें शासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि एक बीमार बुजुर्ग की अगुवाई में उठी यह आवाज सत्ता के गलियारों तक कितनी मजबूती से पहुंचती है और क्या भवानी नगर की जनता को वास्तव में न्याय और बेहतर सड़क मिल पाती है, या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा।











