उत्तर प्रदेश

Kanpur News : ‘भ्रष्टाचार’ के खिलाफ मैदान में भाजपा पार्षद : नगर निगम के टेंडरों में लगातार भ्रष्टाचार उजागर, अफसरों ने साधा मौन व्रत

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KANPUR NEWS : टेंडर आवंटन में कथित गड़बड़ी को लेकर एक बार फिर कानपुर नगर निगम सवालों के घेरे में आ गया है। उद्यान विभाग में चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार कर टेंडर आवंटित करने का आरोप लगाते हुए भाजपा पार्षदों ने शुक्रवार को मोर्चा खोल दिया। वार्ड 51 बर्रा के भाजपा पार्षद सुधीर यादव के नेतृत्व में कई पार्षद और पार्षदपति नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान नगर निगम के अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। पार्षदों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।


 

वार्ड संख्या ने खोली टेंडर की ‘पोल’

धरने पर बैठे भाजपा पार्षद सुधीर यादव ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि उनके वार्ड में उद्यान विभाग की ओर से एक कार्य का वर्कऑर्डर जारी किया गया है। बताया गया कि यह वर्कऑर्डर उद्यान प्रभारी सहायक अभियंता दिवाकर भास्कर की ओर से जारी किया गया है। पार्षद के मुताबिक मामले की जानकारी जुटाने और दस्तावेजों की पड़ताल करने पर फाइल नंबर 594/उद्यान/2025-26 सामने आया, जिसे उन्होंने फर्जी तरीके से तैयार कर ठेकेदार को कार्य आवंटित किए जाने का आरोप लगाया। पार्षद का दावा है कि पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कार्यस्थल और संबंधित वार्ड को लेकर खड़ा हो रहा है। जिस स्थान पर कार्य कराया जाना बताया जा रहा है, वह जोन-3 के अंतर्गत आने वाले वार्ड संख्या 77 का हिस्सा है। जबकि दस्तावेजों में कार्य को जोन-5 के अंतर्गत आने वाले वार्ड संख्या 51 के नाम पर तैयार किए जाने का आरोप है। पार्षदों का कहना है कि वार्ड और जोन में इस तरह का अंतर सामने आना पूरे टेंडर की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।

मौके पर नहीं है नए काम की जरूरत

भाजपा पार्षद सुधीर यादव ने बताया कि जब उन्होंने संबंधित कार्यस्थल पर जाकर स्वयं पड़ताल की तो वहां ऐसा कोई नया कार्य दिखाई नहीं दिया, जिसकी तत्काल आवश्यकता हो। उनका आरोप है कि जिस काम के नाम पर टेंडर और वर्कऑर्डर जारी किया गया, उसकी वास्तविक जरूरत ही संदिग्ध है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किस आधार पर सरकारी धन खर्च करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पार्षदों ने आरोप लगाया कि यदि दस्तावेजों में वार्ड और जोन की स्थिति अलग-अलग है और मौके पर भी नए कार्य की आवश्यकता नहीं है तो टेंडर प्रक्रिया की जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने पूरे मामले में संबंधित फाइल, वर्कऑर्डर और कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।

नगर आयुक्त से मिलने पहुंचे, नहीं हुई मुलाकात

धरने पर बैठे पार्षदों ने आरोप लगाया कि कथित गड़बड़ी को लेकर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय से शिकायत करने के लिए उन्होंने कई बार मिलने का प्रयास किया, लेकिन दो दिनों तक उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। शुक्रवार को पार्षद नगर आयुक्त से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। पार्षदों के अनुसार उन्हें वेटिंग रूम में बैठने के लिए कहा गया, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी नगर आयुक्त से मुलाकात नहीं हो सकी। पार्षदों का आरोप है कि नगर आयुक्त बिना उनसे मिले ही कार्यालय से चले गए। इस घटनाक्रम के बाद पार्षदों में नाराजगी और बढ़ गई। इसके बाद उन्होंने नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर ही धरना शुरू कर दिया।

अफसरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी

धरने के दौरान पार्षदों और उनके समर्थकों ने नगर आयुक्त तथा प्रभारी उद्यान दिवाकर भास्कर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। धरने की सूचना मिलते ही नगर निगम के अधिकारियों में हलचल मच गई। कार्यालय परिसर में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल रहा। प्रदर्शन कर रहे पार्षदों ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की जांच और उनकी शिकायत पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।

जांच और कार्रवाई की मांग

भाजपा पार्षदों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित फाइल, टेंडर प्रक्रिया, वर्कऑर्डर और मौके पर हुए अथवा प्रस्तावित कार्य की जांच कराई जाए। साथ ही यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। पार्षदों के इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया और उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।

खबर समाप्त….

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Ashutosh Mishra "Rudra"

आशुतोष मिश्र 'रुद्र' पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री के साथ-साथ एलएलबी डिग्री धारक हैं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत वर्ष 2006 में पंजाब केसरी दिल्ली से हुई। इसके बाद दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट कानपुर, अमर उजाला प्रकाशन कानपुर में उप-सम्पादक के पद पर करीब आठ वर्ष सेवाएं दीं। अमर उजाला की ओर से वह उप्र राज्य सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से उन्हें अधिमान्य पत्रकार की उपाधि प्राप्त हुई। आशुतोष मिश्र 'रुद्र' वर्तमान में INDIA NEWS 24x7 डिजिटल में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। रुद्र नागरिक सुविधाओं और विकास से जुड़े विभागों में 'खोजी पत्रकारिता' के लिए विशेष तौर पर जाने जाते हैं। नगर निगम, विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार एवं कई चर्चित घोटालों का उन्होंने खबरों के माध्यम से पर्दाफाश किया है। स्पष्ट एवं निष्पक्ष लेखन के कारण वह पत्रकारिता क्षेत्र में विशेष रूप से जाने जाते हैं।

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