KANPUR NAGAR NIGAM : नगर निगम के टेंडर घोटाले की जांच अब सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रही। एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए विभागीय दस्तावेजों के साथ मौके पर जाकर सत्यापन शुरू कर दिया है। मंगलवार को नगर निगम के अभियंत्रण विभाग में टीम पहुंची तो कर्मचारियों में खलबली मच गई। ब्लैकलिस्ट किए गए ठेकेदारों से जुड़ी फाइलें खुलीं, टेंडर प्रक्रिया और आवंटन से जुड़े सवाल पूछे गए। शाम होते-होते दो अभियंताओं को साथ लेकर टीम के रवाना होने की चर्चा ने हलचल और बढ़ा दी। सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद घोटाले से जुड़ी फर्मों के हॉट मिक्स प्लांट का भौतिक सत्यापन भी कराया गया। हालांकि, अधिकारी इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि करने से बच रहे हैं। नगर निगम मुख्यालय में अफसरों की चुप्पी और लगातार बढ़ती जांच के बीच अब निगाहें एसआईटी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
जांच बढ़ी तो ‘खिलाड़ियों’ की धड़कनें भी बढ़ीं
टेंडर घोटाले की परतें खुलने के साथ ही जांच का फोकस अब उन लोगों तक पहुंच रहा है, जिन्होंने टेंडर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों में भूमिका निभाई। सूत्रों का कहना है कि जांच से संबंधित रिपोर्ट नियमित रूप से शासन स्तर तक भेजी जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में कई और नाम और दस्तावेज जांच के दायरे में आ सकते हैं।
एक्शन पर ब्रेक, लेकिन राहत नहीं
घोटाला सामने आने के बाद नगर निगम में तबादले और निलंबन की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। कई बाबुओं को इधर से उधर किया गया, जबकि मार्ग प्रकाश विभाग में गैंगमैन और स्विचमैन समेत 12 कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई। अब सूत्रों के अनुसार, टेंडर घोटाले से सीधे जुड़े कुछ अभियंताओं और कर्मचारियों के खिलाफ प्रस्तावित निलंबन की कार्रवाई फिलहाल रोक दी गई है। वजह यह बताई जा रही है कि एसआईटी को जांच के दौरान संबंधित कर्मचारियों और अभियंताओं से पूछताछ के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हासिल करने हैं। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले प्रशासनिक कार्रवाई होने पर जांच की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई गई। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी की आपत्ति के बाद फिलहाल कार्रवाई रोकने का निर्णय लिया गया। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं कि संबंधित लोगों को क्लीनचिट मिल गई है। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय होने पर निलंबन समेत बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
एसआईटी ने खोली फाइलें, अभियंताओं से पूछताछ
मंगलवार सुबह एसआईटी की टीम नगर निगम के अभियंत्रण विभाग पहुंची। मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने की बात सामने आई। टीम ने कर्मचारियों से ब्लैकलिस्ट किए गए ठेकेदारों की फाइलें मंगवाईं। करीब सवा घंटे तक टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी औपचारिकताओं और आवंटन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई। शाम चार बजे के बाद टीम दो अभियंताओं को साथ लेकर रवाना हुई। इसके बाद हॉट मिक्स प्लांट के भौतिक सत्यापन की चर्चा सामने आई। इससे पहले एसआईटी नगर निगम मुख्यालय में अभियंताओं से पूछताछ कर चुकी है।
25 से ज्यादा बैंक खातों पर नजर!
जांच अब आर्थिक लेनदेन तक पहुंचने के संकेत भी मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस टेंडर प्रक्रिया से जुड़े वित्तीय लेनदेन की कड़ियां खंगाल रही है। मुख्य आरोपितों गोविंद शर्मा, रज्जन बाजपेई और संदीप जैन से जुड़े 25 से अधिक बैंक खातों को सीज कराने के लिए रिपोर्ट भेजे जाने की चर्चा है। पुलिस को आशंका है कि इन खातों के जरिए टेंडर प्रक्रिया से जुड़े लेनदेन हुए हो सकते हैं। हालांकि, बैंक खातों को सीज किए जाने की कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब नाला सफाई की फाइलों की बारी
टेंडर घोटाले की जांच के बीच नगर निगम ने नाला सफाई के कामों की भी पड़ताल शुरू कर दी है। नगर आयुक्त ने पिछले तीन वर्षों में हुई नाला सफाई की फाइलें तलब की हैं। अभियंत्रण और स्वास्थ्य विभाग से छोटे-बड़े नालों की सफाई का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। जांच में टेंडर में दर्ज कार्यों का मौके पर हुए काम से मिलान किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि जिन नालों की सफाई के नाम पर भुगतान हुआ, वहां वास्तव में काम हुआ था या नहीं। आधा-अधूरा काम कर भुगतान किए जाने की शिकायतों की भी जांच हो सकती है।
शहर में जलभराव की लगातार सामने आती समस्या के बीच नाला सफाई की फाइलों की पड़ताल इसलिए भी अहम मानी जा रही है। पहले भी लापरवाही मिलने पर कई ठेकेदार फर्मों पर कार्रवाई और करीब 10 फर्मों को ब्लैकलिस्ट किए जाने की बात सामने आई थी। अब जांच की आंच फाइलों से निकलकर मौके और बैंक खातों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में एसआईटी की रिपोर्ट के बाद किस पर गाज गिरती है, इसका इंतजार है।

