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कारवां गुजर गया, गीतों की खुशबू रह गई: दिल्ली में महाकवि नीरज की याद में सजा गीतों का कारवां

दिल्ली में ‘कारवां गीतों का… नीरज’ कार्यक्रम में साहित्य, संगीत और सिनेमा जगत की हस्तियां जुटीं; कालजयी गीतों की प्रस्तुतियों ने महाकवि नीरज की यादें फिर ताजा कर दीं।

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NEW DELHI :  पद्मभूषण महाकवि गोपाल दास ‘नीरज’ की साहित्यिक और गीतात्मक विरासत को याद करते हुए राजधानी दिल्ली में ‘कारवां गीतों का… नीरज’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संगीत, कला और सिनेमा जगत की कई हस्तियां शामिल हुईं।


नीरज की याद में सजी गीतों की महफिल

भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क, गोपाल दास नीरज फाउंडेशन ट्रस्ट और सोनवी इवेंट्स, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन में महाकवि नीरज के साहित्यिक योगदान और हिंदी गीतों की दुनिया में उनके विशेष स्थान को याद किया गया।


मंच पर गूंजे नीरज के कालजयी गीत

कार्यक्रम में महाकवि नीरज के लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियों ने माहौल को भावुक कर दिया। ‘कारवां गुजर गया’, ‘फूलों के रंग से’ और ‘ए भाई जरा देख के चलो’ जैसे गीतों ने दर्शकों को नीरज की रचनात्मक दुनिया से फिर जोड़ दिया। गीतों की प्रस्तुतियों के दौरान सभागार में मौजूद लोग भावविभोर नजर आए।


प्रेम और संवेदना से जुड़ती हैं नीरज की रचनाएं

केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने महाकवि नीरज की साहित्यिक विरासत को नमन करते हुए कहा कि उनके गीत आज भी लोगों को प्रेम, संवेदना और मानवीय मूल्यों से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि नीरज की रचनाओं की खासियत यही है कि समय बदलने के बावजूद उनका भाव और प्रभाव कम नहीं हुआ।


‘सदी के महाकवि’ के रूप में याद किए गए नीरज

भारत एक्सप्रेस के सीएमडी एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय ने गोपाल दास ‘नीरज’ को ‘सदी का महाकवि’ बताते हुए उनके साहित्यिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि नीरज के गीत और विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक और प्रभावशाली हैं। उनकी रचनाओं ने साहित्य से लेकर सिनेमा तक अपनी अलग पहचान बनाई।


शब्दों का कारवां आज भी जारी

‘कारवां गीतों का… नीरज’ कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महाकवि नीरज भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके शब्द और गीत अब भी लोगों के बीच जीवित हैं। उनकी रचनाओं में जिंदगी के सुख-दुख, प्रेम, विरह और उम्मीद के ऐसे रंग हैं, जो हर दौर के पाठक और श्रोता को अपने करीब महसूस होते हैं।


नीरज की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प

कार्यक्रम में प्रस्तुत गीतों और वक्ताओं के विचारों के बीच एक बात साफ तौर पर उभरकर सामने आई कि महाकवि नीरज की रचनाएं किसी एक दौर की विरासत नहीं हैं। उनके शब्द पीढ़ियों के बीच संवाद कायम कर रहे हैं और यही उनके साहित्य की सबसे बड़ी ताकत है। नीरज का गीतों का कारवां आज भी जारी है और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता रहेगा।


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