
कानपुर: जैसे जैसे समय डिजिटल हो रहा है वैसे वैसे अपराध और अपराधियों के तरीके भी डिजिटल मोड़ पर अपग्रेड हो रहें हैं । ऐसे में अक्सर अच्छी नौकरी की चाहत रखने वाले लोगों के लिए कानपुर से सावधान करती ये खबर है, जहाँ विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर हजारों लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दो युवक और दो युवतियां शामिल हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड हरिओम पांडे नाम का युवक है, जानकारी के अनुसार मास्टरमाइंड हरिओम एमए तक शिक्षित है। ये गिरोह वर्षों से लोगों की जरूरतों के हिसाब से उन्हें अपना निशाना बनाता था और इस ठगी को अंजाम दे रहा था । जानकारी में सामने आया है कि ये गिरोह अब तक करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर चुका है । लेकिन कानपुर पुलिस की हाईटेक प्रणाली के आगे आखिर गिरोह के सभी सदस्यों को सरेंडर करना पड़ गया ।
हाईटेक ठग इस तरह से आम लोगों को बनाते थे निशाना, ऐसे करते थे ठगी ?
डिजिटल युग मे गिरोह के सदस्य भी शातिराना अंदाज में ठगी को अंजाम देते थे, इस दौरान ये ठग ‘Elite Global Careers‘ और ‘Overseas Consultancy‘ नामक फर्जी वेबसाइटें चलाते थे। ये वेबसाइटें बिल्कुल असली जॉब कंसल्टेंसी जैसी दिखती थीं, जिससे लोग आसानी से इनकी जालसाजी में फंस जाते थे और अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई गवा देते थे ।
प्रतिष्ठित वेबसाइटों पर सक्रिय होकर ठग करते थे दुरप्रयोग
पकड़े गए गिरोह के सदस्य Naukri.com और अन्य जॉब पोर्टल्स का दुरुपयोग करते थे। वे उन उम्मीदवारों का डेटा चुरा लेते थे, जिन्होंने विदेश में नौकरी पाने के लिए अपने रिज्यूमे अपलोड किए थे। इसके बाद, गिरोह के टेली कॉलर्स इन उम्मीदवारों को कॉल करके उन्हें आकर्षक विदेशी नौकरी का ऑफर देते थे। आरोपी ऑनलाइन इंटरव्यू की व्यवस्था कराते थे, जिससे उम्मीदवारों को यह प्रक्रिया पूरी तरह वास्तविक लगे। ठगी के पहले चरण में 25,000 से 30,000 रुपये की मांग की जाती थी, जिसे ‘प्रोसेसिंग फीस’ और ‘वेरिफिकेशन चार्ज’ बताया जाता था। दूसरे चरण में वीजा, ट्रैवल और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर 4.5 लाख रुपये तक ऐंठ लिए जाते थे। पैसा मिलते ही आरोपी अपने मोबाइल नंबर बंद कर देते थे और पीड़ित से संपर्क खत्म कर देते थे।
ठगी के इस गिरोह के नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि यह गिरोह केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी सक्रिय था। गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया के जरिए भी नौकरी के फर्जी विज्ञापन पोस्ट करते थे और लोगों को जाल में फंसाते थे। इस गिरोह की कार्यप्रणाली इतनी संगठित थी कि यह अपने फर्जी इंटरव्यू बोर्ड और नियुक्ति पत्रों तक का इंतजाम करता था, जिससे उम्मीदवारों को धोखाधड़ी का आभास न हो। पुलिस को संदेह है कि गिरोह के कुछ अन्य साथी भी इस अपराध में शामिल हो सकते हैं और उनकी तलाश की जा रही है।

पकड़े गए ठगों के पास से पुलिस ने की बड़ी बरामदगी
कानपुर पुलिस ने इस गिरोह के ठिकानों पर छापा मारकर भारी मात्रा में डिजिटल और भौतिक साक्ष्य बरामद किए हैं। पुलिस को इनके पास से तीन लैपटॉप, 9 स्मार्टफोन, 14 कीपैड मोबाइल, 8 मोबाइल सिम, एक जियो वाई-फाई डिवाइस, कई बैंक पासबुक और डेबिट कार्ड, हुंडई वेरना कार बरामद हुई है!
लाखों लोगों को बनाया निशाना, ठगी का आंकड़ा 3-4 करोड़ रुपये के पार
पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने अब तक प्रदेशभर में लाखों लोगों को निशाना बनाया है। डीसीपी क्राइम सैयद मोहम्मद कासिम ने बताया कि गिरोह के सदस्य न केवल फोन कॉल के माध्यम से बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Facebook, WhatsApp, Telegram और Instagram पर भी नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। अब तक की जांच में अनुमान लगाया गया है कि इस गिरोह ने लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। पुलिस इस नेटवर्क में शामिल अन्य अपराधियों की पहचान करने और गिरोह को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
पुलिस की अपील: ठगी से बचने के लिए रखें सावधानी
इस मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे नौकरी के नाम पर किसी भी अनजान कंपनी को पैसे न दें। यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन इंटरव्यू के नाम पर पैसे मांगता है, तो पहले उसकी जांच-पड़ताल करें। यदि किसी को भी इस प्रकार की ठगी का संदेह होता है, तो वे तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाएं।
