KANPUR NEWS। मुख्यमंत्री नाराज हैं। शनिवार को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कानपुर नगर निगम के ठेकों में माफियागिरी और भ्रष्टाचार को लेकर योगी आदित्यनाथ ने निगम प्रशासन को चेतावनी दे दी है। मगर, सवाल यह है कि हाल ही में उजागर हुए टेंडर घोटाले को लेकर अभी तक नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने जांच कमेटी का गठन क्यों नहीं किया? कथित भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे अभियंता आदि स्टाफ को ‘अभयदान’ क्यों दिया जा रहा है? सबसे अहम सवाल है कि जांच करेगा कौन। जिस विभाग के अफसर-अभियंता खुद संदेह के घेरे में हैं। उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है। हालांकि, नगर विकास विभाग के हाई ऑफिशियल सोर्सेज के हवाले से खबर है कि टेंडर घोटाले को लेकर शासन सख्त कदम उठा सकता है। जांच और फिर नतीजे आने के बाद गाज गिरनी तय है।
नगर निगम द्वारा पूर्व में जारी 37 विकास कार्यों के टेंडर में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए अलीगढ़ निवासी अमित उपाध्याय ने शासन को सभी साक्ष्यों के साथ पत्र भेजा था। शिकायतकर्ता ने नगर निगम कानपुर के सहायक अभियंता (प्रभारी अधीक्षक उद्यान विभाग) के खिलाफ वेबसाइट पर ई-टेंडर्स की अपलोडिंग में खेल करते हुए टेंडर पूलिंग का गम्भीर आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ठेकेदार ने हलफनामे पर शिकायत के साथ-साथ ई-टेंडर्स में कथित तौर पर हुए भ्रष्टाचार से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस (साक्ष्य) नगर आयुक्त को भेजे हैं। इससे पहले कि आरोप तय हो पाते, टेंडर्स निरस्त कर दिए गए। निगम प्रशासन पूरे मामले को घोंट गया।
उद्यान विभाग में खेल : मामला नगर निगम के उद्यान विभाग से जुड़ा है। मई और जून 2026 में विकास कार्यों के ई-टेंडर्स में कथित तौर पर हुए भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता अमित उपाध्याय ने नगर आयुक्त, चीफ इंजीनियर को नोटरी के साथ टेंडर्स में हुई गड़बड़ी की लिखित शिकायत भेजी थी। प्रभारी अधीक्षक उद्यान विभाग पर आरोप है कि उन्होंने ई-टेंडर्स को लास्ट मूमेंट (अंतिम समय से कुछ देर पहले) अपलोड कर टेंडर पूलिंग की है।
जोन 2 अंतर्गत वार्ड 68 में टेंडर रेफरेंस नम्बर 1192/AA-2/25-26 पर डेकोरेटिव लाइटिंग कार्य का ई-टेंडर पोर्टल पर 23 मई 2026 को दोपहर 12 बजे अपलोड किया गया। जबकि, दोपहर 3 बजे टेंडर की डेडलाइन थी। इसके अलावा न्यूनतम निविदादाता द्वारा मात्र 0.10 परसेंट बिलो टेंडर डाला गया। दूसरे निविदादाता द्वारा 0.50 परसेंट बिलो टेंडर डाला गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बिलो टेंडर का कम परसेंट इस बात की तस्दीक करता है कि अन्तिम समय में टेंडर की अपलोडिंग के पीछे वजह टेंडर पूलिंग थी। कुछ ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की मंशा से ऐसा किया गया। इससे सरकारी राजस्व का भी नुकसान हुआ है।
दूसरे केस में जोन 6 अंतर्गत वार्ड 85 में तिकोना पार्क में ई-टेंडर रेफरेंस नम्बर 716/UDYAN/25-26 का टेंडर 4 मई 2026 को टेंडर डेडलाइन के मात्र एक दिन पहले सुबह 10 बजे अपलोड किया गया। इस टेंडर में भी न्यूनतम निविदादाता द्वारा 1.02 परसेंट बिलो और दूसरे निविदादाता द्वारा 0.57 परसेंट बिलो टेंडर डाला गया। शिकायकर्ता का तर्क है कि जब नगर निगम में ठेकेदारों के बीच तगड़े कम्पटीशन के चलते 15-30 परसेंट तक बिलो टेंडर आम बात है।
एक कम्प्यूटर से सारा खेल : शिकायतकर्ता ने अपने हलफनामे में एक और बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। उसने दावा किया है कि 26 जून 2026 को हुए 37 कार्यों के ई-टेंडर्स में अजीबोगरीब खेल हुआ। एक ही कम्प्यूटर से ज्यादातर टेंडर्स अपलोड किए गए और उसी कम्प्यूटर से टेंडर डाल भी दिए गए। यह गम्भीर आरोप है, जिसका जवाब दे पाना निगम प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा। टेंडर्स को स्वीकृति मिलने के बाद सही समय पर वेबसाइट पर अपलोड न करना और बिलो टेंडर का मिनिमम रेशियो कहीं भ्रष्टाचार की तस्दीक कर रहा है।
इंडिया न्यूज 24×7 डिजिटल का उद्देश्य किसी अधिकारी, अभियंता या सरकारी विभाग की छवि धूमिल करना नहीं है। शिकायतकर्ता के दावों की सत्यता की भी समाचार पत्र किसी प्रकार से पुष्टि नहीं कर रहा है। लेकिन, आरोप गम्भीर हैं लिहाजा जांच तो होनी ही चाहिए थी। ऐसा कोई आदेश प्रकाश में नहीं आया। सिर्फ टेंडर निरस्त होने की जानकारी मिली। यह पहला मामला नहीं है। टेंडर्स में भ्रष्टाचार से जुड़ी कई शिकायतें पेंडिंग हैं। पार्षदों के पत्र धूल फांक रहे हैं। महापौर भी नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली से खुश नहीं हैं। शासन तक इस बात की खबर है। ऐसे में मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद इस कथित भ्रष्टाचार पर नगर आयुक्त जांच कराते हुए कार्यवाही करते हैं या सीएम का आदेश भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा। आने वाला वक्त बताएगा।
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