कानपुर

मां की बीमारी में घर संभाला और पढ़ाई भी की: कानपुर की प्रगति शुक्ला ने 97.4% अंक हासिल कर माता-पिता का सिर ऊंचा किया!

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रिपोर्ट @ नीरज अवस्थी – यूपी हेड – इंडिया न्यूज़ 24×7

कानपुर : मुश्किलों के बीच भी लक्ष्य हासिल करने की मिसाल पेश की है कानपुर की एक जुझारू बेटी ने। जवाहर नगर निवासी प्राइवेट नौकरी करने वाले मनीष शुक्ला की बड़ी बेटी प्रगति शुक्ला ने मां की गंभीर बीमारी के दौरान न केवल पूरे घर की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 97.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। यह उपलब्धि पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय बन गई है। प्रगति शुक्ला सर पदमपत सिंघानिया एजुकेशन सेंटर में कक्षा 10 की छात्रा है। करीब एक साल से उसकी मां शालिनी शुक्ला स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं। चलने-फिरने में काफी दिक्कत होने लगी थी, जिसके कारण घर के सारे काम प्रभावित हो रहे थे। ऐसे कठिन समय में बड़ी बेटी होने के नाते प्रगति ने आगे आकर पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।

पढ़ाई के साथ-साथ प्रगति सुबह से शाम तक घर के सारे कामकाज संभालती थी । रसोई से लेकर सफाई, छोटी बहन की देखभाल और मां की सेवा तक। मां को आराम देने के लिए वह खुद रात देर तक जागकर पढ़ाई करती थी। परीक्षा के दिनों में भी उसने कोई कोताही नहीं बरती। बोर्ड परीक्षा देते समय भी वह घर की जिम्मेदारियों को निभाती रही ताकि मां को अतिरिक्त तनाव न हो।


बुधवार को जब हाईस्कूल का परिणाम घोषित हुआ तो प्रगति के 97.4% अंक देखकर पूरा परिवार भावुक हो गया। माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। मनीष शुक्ला ने बताया, “हमारी दो बेटियां हैं, लेकिन उन्होंने कभी बेटों की कमी महसूस नहीं होने दी। प्रगति ने परीक्षा के समय घर संभाला, मां की सेवा की और फिर भी मन लगाकर पढ़ाई की। हमें अपनी बेटियों पर बेहद गर्व है।”

शालिनी शुक्ला ने भी अपनी बड़ी बेटी की तारीफ करते हुए कहा कि प्रगति ने न सिर्फ परिवार की मदद की बल्कि अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी चुनौती का सामना कर सकती हैं। प्रगति का यह संघर्ष आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। पड़ोसी और रिश्तेदार भी इस जुझारू लड़की की सराहना कर रहे हैं।


यह कहानी उन हजारों बेटियों की है जो घर की जिम्मेदारियों के बीच भी अपनी पढ़ाई और सपनों को नहीं छोड़तीं। प्रगति ने साबित किया कि सही इरादे और मेहनत से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। उसके पिता मनीष शुक्ला प्राइवेट नौकरी करते हैं, इसलिए परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है, फिर भी प्रगति ने कभी बहाने नहीं बनाए। अब प्रगति आगे इंटरमीडिएट में पढ़ाई जारी रखना चाहती है और डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देख रही है। परिवार की ओर से उसे पूर्ण समर्थन मिल रहा है। इस सफलता पर स्कूल प्रबंधन ने भी प्रगति को बधाई दी है और अन्य छात्राओं के लिए उसे प्रेरणा स्रोत बताया है।

कानपुर जैसे शहर में ऐसी कई अनकही कहानियां हैं, जहां बेटियां चुपचाप घर और पढ़ाई दोनों को संभाल रही हैं। प्रगति शुक्ला की यह उपलब्धि उन सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो परिवार की परिस्थितियों के बावजूद आगे बढ़ना चाहती हैं। माता-पिता का कहना है कि बेटियां सिर ऊंचा करके परिवार का नाम रोशन कर रही हैं और समाज को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे को सार्थक बना रही हैं। प्रगति की मेहनत और समर्पण की कहानी न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है।


 

Anurag Srivastava

खबरों की दुनिया में अनुराग श्रीवास्तव का सफर 2009 से शुरू हुआ था, जो अभी भी जारी है। पत्रकारिता जगत में कानपुर संवाद समाचार पत्र से सफ़र शुरू करते हुए, स्टार न्यूज़, वॉइस ऑफ़ इंडिया, सी न्यूज़, सहारा समय, बंसल न्यूज़, इंडिया टीवी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में बीते 16 साल से क्राइम, राजनितिक, एंटरटेनमेंट, एजुकेशन से जुडी हर छोटे-बड़े विषयों की ख़बर पर पकड़ रखते हैं। अनुराग श्रीवास्तव फिलहाल इंडिया न्यूज़ 24x7 .कॉम में बतौर एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। खाली समय में क्रिकेट खेलने, घूमने, फिल्‍में/वेब सीरीज, न्यूज़ चैनल देखने और किताबें पढ़ने का शौक रखते हैं।

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