

कानपुर । शहर के लिए गर्व का प्रतीक रहे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड धारक राधाकांत बाजपेयी का रविवार सुबह 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और कानपुर के मधुराज हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। रविवार सुबह इलाज के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई और लोगों में गहरा दुख देखने को मिला।
राधाकांत बाजपेयी अपनी अनोखी पहचान के चलते न केवल कानपुर, बल्कि पूरे देश और विदेशों में भी प्रसिद्ध थे। उनके कान के बाल लगभग 25 सेंटीमीटर लंबे थे, जो दुनिया में सबसे लंबे माने गए। इसी दुर्लभ और अनोखी विशेषता के कारण उन्होंने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं थी, बल्कि कानपुर शहर के लिए भी गर्व का विषय बनी रही। अक्सर वे मीडिया और सामाजिक कार्यक्रमों में अपनी इस विशेष पहचान के कारण चर्चा में रहते थे।
विकास नगर निवासी स्वर्गीय बाजपेयी का जीवन बेहद सादगीपूर्ण रहा। वे सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और हंसमुख प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। जिन्होंने भी उनके साथ समय बिताया, वे उनके व्यवहार और सकारात्मक सोच से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां और एक बेटे का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार और परिचितों के बीच उनकी छवि एक स्नेही, प्रेरणादायक और जमीन से जुड़े व्यक्ति की रही।
उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके निवास पर रिश्तेदारों, मित्रों, पड़ोसियों और प्रशंसकों का तांता लग गया। सभी ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साथ बिताए पलों को याद किया। कई लोगों ने कहा कि राधाकांत बाजपेयी ने अपनी अनोखी पहचान से कानपुर का नाम विश्व पटल पर पहुंचाया।
रविवार दोपहर उनका अंतिम संस्कार भगवत दास घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। अंतिम यात्रा के दौरान वातावरण गमगीन रहा और हर किसी की जुबान पर बस यही था कि कानपुर ने एक अनोखी पहचान वाला व्यक्तित्व खो दिया।






