उत्तर प्रदेश

मुश्किल में ‘मुर्दे’ और मौज में ‘हाकिम’

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रिपोर्ट : आशुतोष मिश्र ‘रूद्र’

■ भैरवघाट विद्युत शवदाह गृह बंद, शवों के अंतिम संस्कार के लिए भटक रहे लोग

■ भगवतदास घाट में चालू एक मशीन के सहारे पूरा शहर, नगर निगम अभियन्ताओं की संवेदनहीनता

कानपुर। नगर निगम के लापरवाह अभियन्ताओं के ‘गुनाह’ की सजा जिंदा इंसान नहीं मुर्दे भी भुगत रहें है, इस बात की नजीर अपनी आंखों से देखनी हो तो भैरवघाट मोक्षधाम आ जाइए। यहां पर 9 मई दिन गुरुवार से विद्युत शवदाह गृह बंद पड़ा है। वजह, दोनों मशीनें खराब पड़ी हैं। जिसमें एक मशीन तो पिछले साल अगस्त 2023 से बंद पड़ी है। नौ महीने का वक्त बीत गया। नगर निगम के विद्युत/यांत्रिक विभाग के अभियन्ताओं को मशीन ठीक कराने की फुर्सत नहीं मिली। नतीजा सामने आ गया। गेट पर ‘प्लांट बंद है’ की नोटिस चस्पा है। अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शव लिए इधर से उधर भटक रहे हैं।

संवेदनहीनता की हद : सबसे पहले आपको बता दें कि शहर में नगर निगम के द्वारा दो विद्युत शवदाह गृह संचालित किए जा रहे हैं। एक भैरवघाट मोक्षधाम के बगल में बना है और दूसरा भगवतदास घाट पर स्थापित है। लेकिन, भगवतदास घाट विद्युत शवदाह गृह थोड़ा दूरी पर होने के कारण ज्यादातर शव भैरवघाट विद्युत शवदाह गृह पर ही आते हैं। सामान्य तौर पर यहां लावारिस शवों का अंतिम संस्कार होता है। लेकिन, ऐसा नहीं है। पर्यावरण को संरक्षित करने की विचारधारा रखने वाले जैन, सिख और हिन्दू धर्म के भी तमाम परिवार विद्युत शवदाह गृह में मशीन के जरिए अंतिम संस्कार कराने आ रहे हैं। लेकिन, जब मशीन ही खराब पड़ी है तो कोई पड़ोस में बने घाट पर लकड़ियों से अंतिम संस्कार कराने को मजबूर है तो कोई भगवतदास घाट भेज दिया जाता है। सूत्रों द्वारा पता चला है कि वहां भी दो में से एक ही मशीन काम कर रही है। कुल मिलाकर विद्युत शवदाह के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए पूरे शहर से आने वाले शव एक मशीन के सहारे हैं। वह भी कितने दिन लोड झेल पाएगी, कुछ पता नहीं।

गेट पर चस्पा नोटिस : नगर निगम से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 9 मई से भैरवघाट स्थित विद्युत शवदाह गृह पर मशीन के जरिए अंतिम संस्कार का कार्य पूरी तरह से बंद है। यह भी जानकारी मिली है कि यहां लगी दो इलेक्ट्रॉनिक मशीनों में से एक मशीन करीब आठ महीने से तकनीकी खराबी की वजह से बंद पड़ी है। एक मशीन के सहारे किसी तरह शवों का अंतिम संस्कार हो रहा था। हालांकि, इसमें लोगों को काफी समस्या का सामना भी करना पड़ रहा था। उन्हें अंतिम संस्कार और अंत में मृतक के शरीर की राख लेने के लिए घन्टों इंतजार करना पड़ रहा था। फिलहाल, दोनों मशीनें बंद पड़ी हैं। मेन गेट पर नोटिस चस्पा है। उधर यह भी पता चला है कि भगवतदास घाट पर भी एक मशीन से ही अंतिम संस्कार हो रहा है। ऐसे में लोगों को किस कदर समस्या का सामना करना पड़ रहा होगा। इसका अंदाजा लगा सकते हैं।

कानपुर नगर आयुक्त शिव शरणप्पा जीएन के स्पष्ट निर्देश हैं कि जनता की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य में किसी तरह की समस्या आने पर तत्काल निस्तारण किया जाए। चाहे शहर की साफ-सफाई का मामला हो, सिविक ऐमेनिटीज हों या शवों के अंतिम संस्कार आदि से जुड़ा कोई मसला हो। विभाग का सबसे बड़ा अफसर भले दिन में फील्ड पर रहता हो, लेकिन मातहत लापरवाही की पराकाष्ठा पार कर चुके हैं। विद्युत शवदाह गृह के संचालन और देखरेख का जिम्मा नगर निगम का विद्युत/यांत्रिक विभाग संभालता है। लेकिन, हकीकत यह है कि अफसर शायद ही कभी झांकने जाते हों। इसका प्रमाण यह है कि एक मशीन जो पिछले करीब नौ महीने से बंद पड़ी है। उसे अभी तक नगर निगम के इंजीनियर ठीक नहीं करा सके। अफसरों की लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि पूरा प्लांट ही ठप हो गया। भैरवघाट विद्युत शवदाह गृह से मायूस होकर शव लेकर लौट रहे लोगों ने बातचीत के दौरान कहा कि जिम्मेदार अफसरों की यह लापरवाही क्षमा योग्य नहीं है। नगर निगम प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करते हुए उचित संदेश देना चाहिए।

इस पूरे मामले में कानपुर नगर आयुक्त शिव शरणप्पा जीएन का कहना है कि विद्युत शवदाह गृह बंद होने और मशीनों में तकनीकी खराबी की कोई सूचना मुझे नहीं दी गई। यह घोर लापरवाही का प्रतीक है। मैं खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करूंगा। जो भी जिम्मेदार अधिकारी य्या अभियन्ता हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई निश्नित तौर पर होगी। जल्द से जल्द प्लांट चालू होगा।

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