■ कानपुर के रतन लाल नगर में स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल में युवा वक्ताओं ने प्रतियोगिता के दौरान रखे दमदार तर्क, 23 स्कूलों के छात्रों ने दिखाई प्रतिभा
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कानपुर। बदलते दौर में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि कौशल आधारित शिक्षा भी सफलता की नई पहचान बन चुकी है। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए रतनलाल नगर स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल में शुक्रवार को के.एस.एस. अंतर विद्यालयीय अंग्रेजी वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में सीबीएसई, कानपुर जोन-बी के 23 विद्यालयों के 46 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और शिक्षा एवं रोजगार के बीच बढ़ती दूरी को लेकर अपने तार्किक और प्रभावशाली विचार प्रस्तुत किए। पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास, भाषा पर पकड़ और विषय की गहरी समझ का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता का विषय “कौशल: शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटना” रखा गया। यह विषय वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है, क्योंकि आज के दौर में डिग्री के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी रोजगार के लिए आवश्यक हो चुके हैं। प्रतिभागियों ने अपने वक्तव्य में कौशल विकास, नई शिक्षा नीति, रोजगार के बदलते स्वरूप, तकनीकी शिक्षा, उद्यमिता और भविष्य की संभावनाओं जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखते हुए पक्ष और विपक्ष में मजबूत तर्क दिए। कई प्रतिभागियों ने वास्तविक उदाहरणों और तथ्यों के माध्यम से अपनी बात रखकर निर्णायकों और श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
प्रतियोगिता का मूल्यांकन डॉ. गीता रंधावा, श्रीमती कविता पांडे और श्रीमती पायल सक्सेना ने किया। निर्णायकों ने विषय-वस्तु, विश्लेषण क्षमता, वक्तृत्व कला, तार्किक सोच, भाषा की शुद्धता, आत्मविश्वास तथा प्रस्तुतीकरण के आधार पर प्रतिभागियों का आकलन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को केवल मंच पर बोलना ही नहीं सिखातीं, बल्कि उनमें नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक सोच और निर्णय लेने की योग्यता भी विकसित करती हैं।
प्रतियोगिता में पक्ष वर्ग में पूर्णचंद्र विद्या निकेतन की ऋतिका पांडे तथा डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर, श्याम नगर की आराध्या त्रिपाठी को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। विपक्ष वर्ग में डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर, श्याम नगर की अनुकृति सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर, जाजमऊ के सानिध्य चतुर्वेदी को द्वितीय पुरस्कार दिया गया। वहीं डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर, जाजमऊ के प्रथम सिंह तथा पूर्णचंद्र विद्या निकेतन के प्रियम रोचलानी को संयुक्त रूप से तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर, किदवई नगर की गर्वित खत्री को पक्ष वर्ग में तथा गुलमोहर पब्लिक स्कूल की चेष्टा शुक्ला को विपक्ष वर्ग में सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
पुरस्कार वितरण समारोह में विजेताओं को ट्रॉफी, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों के उत्साह और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी ऐसी बौद्धिक प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. कृष्णा चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की हर चुनौती के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा के साथ कौशल का समावेश होता है, तभी विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनकर समाज और राष्ट्र के विकास में प्रभावी योगदान दे सकते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में उप-प्रधानाचार्या सुश्री मोनिका जॉन, परीक्षा समन्वयक डॉ. राम पंजवानी, मीनाक्षी शुक्ला, मंजू दुबे, चंद्रशेखर सिंह सहित विद्यालय के शिक्षक एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन विजेता प्रतिभागियों के सम्मान, सभी अतिथियों के प्रति आभार और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ हुआ।









