अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यूयॉर्क में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान को हराने के बाद अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को अपने इलाके के रूप में घोषित कर सकता है। ट्रम्प पहले भी इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा कर चुके हैं।

INTERNATIONAL NEWS : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में अपने समर्थकों और पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान को हराने के बाद अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को अपने इलाके के तौर पर घोषित कर सकता है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत और समझौते की कोशिशें जारी हैं।

ट्रम्प के बयान के बाद ईरान ने भी तीखा पलटवार किया। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने साफ कहा कि होर्मुज ईरान का था, है और आगे भी रहेगा। उन्होंने ट्रम्प के दावे पर तंज कसते हुए कहा कि किसी समुद्री क्षेत्र पर सोशल मीडिया पोस्ट, ट्वीट या चुनावी भाषण के जरिए कब्जा नहीं किया जा सकता। ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि उनका देश धमकियों से डरने वाला नहीं है और किसी भी ताकत के सामने झुकने को तैयार नहीं है।

ट्रम्प का दावा होर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण

ट्रम्प इससे पहले भी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कई बड़े दावे कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अमेरिका का इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर पूरा नियंत्रण है और वह इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखेगा। एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रम्प ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को ‘स्टील की दीवार’ बताते हुए दावा किया था कि ईरान के पास इसका मुकाबला करने का कोई प्रभावी रास्ता नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान का सैन्य ढांचा पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुका है। हालांकि, ईरान लगातार अमेरिकी दावों को खारिज करता रहा है और होर्मुज पर अपने अधिकार को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

ईरान बोला होर्मुज अभी भी बंद है

ईरान की ओर से यह भी दावा किया गया कि होर्मुज स्ट्रेट अभी खुला नहीं है। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं की जातीं, तब तक समुद्री मार्ग को सामान्य रूप से खोलने का फैसला नहीं लिया जाएगा। पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने भी अमेरिकी अधिकारियों के उन दावों को खारिज किया, जिनमें होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की बात कही जा रही थी। अथॉरिटी के मुताबिक, केवल बयान देने से जमीनी स्थिति नहीं बदलती और ईरान की शर्तें पूरी होने तक समुद्री मार्ग को लेकर मौजूदा स्थिति बनी रह सकती है।


होर्मुज खोलने के लिए ईरान की 7 शर्तें

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के बदले अमेरिका के सामने कई मांगें रखी हैं। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका को युद्ध हमेशा के लिए खत्म करना होगा। इसके साथ ही समुद्री नाकाबंदी हटाने और क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की मांग भी की गई है। ईरान की प्रमुख शर्तों में उसके ऊपर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाना, विदेशों में रोकी गई ईरानी संपत्तियों को वापस करना और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देना शामिल है। इसके अलावा ईरान ने अपने सहयोगी गुटों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग भी रखी है।

दुनिया के तेल कारोबार के लिए क्यों अहम है होर्मुज?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में शामिल है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है। युद्ध से पहले दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती थी। यही वजह है कि होर्मुज में तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है। कच्चे तेल के अलावा प्राकृतिक गैस और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की आवाजाही भी इस रास्ते से होती है। समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की लंबी रुकावट से दुनिया के कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

28 फरवरी के बाद तेल ढुलाई पर पड़ा असर

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ गया। समुद्री बारूदी सुरंगों, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे, नाकाबंदी तथा बढ़ी हुई बीमा लागत ने जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया। दावे के मुताबिक, युद्ध से पहले इस रास्ते से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही होती थी, जो संघर्ष के दौरान घटकर करीब 37 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई। इसका असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा।

होर्मुज पर ईरान और ओमान का अधिकार

होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति भी इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। इसके उत्तरी हिस्से में ईरान है, जबकि दक्षिणी हिस्से में ओमान का क्षेत्र आता है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई करीब 21 नॉटिकल मील यानी लगभग 39 किलोमीटर है। समुद्री सीमाओं में बदलाव के बाद ईरान और ओमान ने अपने समुद्री क्षेत्र को 12-12 नॉटिकल मील तक बढ़ाया। इसके चलते स्ट्रेट का संकरा हिस्सा दोनों देशों के समुद्री क्षेत्रों से जुड़ गया। अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही जारी रखने के लिए यहां अलग ट्रांजिट लेन की व्यवस्था की गई। ऐसे में ट्रम्प का होर्मुज को अमेरिका का इलाका घोषित करने वाला बयान केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा संदेश माना जा रहा है। दूसरी तरफ ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह होर्मुज पर अपने दावे से पीछे हटने को तैयार नहीं है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान बातचीत और होर्मुज की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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