KANPUR RTO RAID : कानपुर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में सोमवार को जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से हड़कंप मच गया। करीब 50 पुलिसकर्मियों की टीम ने अचानक कार्यालय परिसर को घेर लिया। पुलिसकर्मी बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर अंदर पहुंचे और दोनों मुख्य गेट बंद करा दिए। कार्रवाई शुरू होते ही परिसर में मौजूद कथित दलालों में भगदड़ मच गई। कई लोग इधर-उधर भागने लगे और कुछ दीवार फांदकर निकलने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने पीछा कर 22 लोगों को पकड़ लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से RTO परिसर में करीब तीन घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। प्रशासन और एसओजी की टीम ने कार्यालय के अलग-अलग हिस्सों में जाकर दस्तावेजों की जांच की। कर्मचारियों के कंप्यूटर और लैपटॉप भी खंगाले गए। इसके साथ ही कैश काउंटर, चालान शाखा और लाइसेंस से जुड़े काउंटरों पर भी रिकॉर्ड का मिलान किया गया।
■ शिकायत ने खोली कार्रवाई की राह
अधिकारियों के मुताबिक, RTO में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले से शिकायतें मिल रही थीं। इस बीच हमीरपुर के ललपुरा क्षेत्र निवासी ट्रक चालक कामता प्रसाद ने जिला प्रशासन से शिकायत की। कामता प्रसाद का कहना है कि वह जेके सीमेंट का ट्रक लेकर जा रहा था। भौंती बाईपास के पास RTO की टीम ने उसके वाहन को रोककर चालान किया। चालक के अनुसार, वाहन पर सीट बेल्ट, हॉर्न और अन्य नियमों से संबंधित आपत्तियां दर्ज की गईं। चालक का आरोप है कि उससे 26,700 रुपये लिए गए, जबकि उसे केवल 21,700 रुपये की रसीद दी गई। भुगतान और रसीद के बीच 5 हजार रुपये के अंतर की शिकायत उसने अधिकारियों से की। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए टीम तैयार की और सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे RTO परिसर में कार्रवाई की गई।
■ चालान शाखा में एक लाख रुपये मिलने से सवाल
छापेमारी के दौरान अधिकारियों की नजर चालान शाखा पर भी गई। यहां चालान बाबू मृदुल मिश्रा के पास करीब एक लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक, मौके पर इस रकम का पूरा हिसाब नहीं दिया जा सका। इसके बाद टीम ने संबंधित दस्तावेजों और कैश रिकॉर्ड का मिलान शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि अभी यह जांच का विषय है कि नकदी किस मद की थी और रिकॉर्ड में इसका उल्लेख क्यों नहीं था। वही कैश विभाग में भी रकम के मिलान के दौरान अंतर सामने आया। बाबू विपिन कुमार के पास करीब 15 हजार रुपये कम पाए जाने की बात बताई गई है। प्रशासन ने अलग-अलग काउंटरों पर कैश की स्थिति की जांच की है।
■ कर्मचारियों के कंप्यूटर और रिकॉर्ड भी खंगाले
जिला प्रशासन और क्राइम ब्रांच की टीम ने RTO के विभिन्न विभागों में दस्तावेजों की जांच की। अधिकारियों ने कर्मचारियों से संबंधित रिकॉर्ड देखने के साथ कंप्यूटर और लैपटॉप की भी पड़ताल की। टीम सारथी भवन पहुंची, जहां वाहन लाइसेंस से संबंधित बायोमीट्रिक प्रक्रिया की जांच की गई। काउंटर नंबर छह पर मौजूद कर्मचारी मुजाहिद फारुकी से पूछताछ हुई। उसने बताया कि दोपहर तक वेबसाइट नहीं चलने के कारण बायोमीट्रिक का काम प्रभावित था। बाद में दोपहर 12 बजे से 3:30 बजे के बीच करीब 15 बायोमीट्रिक किए जाने की जानकारी दी गई।
■ पुलिस टीम ने RI से की बंद कमरे में पूछताछ
कार्रवाई के दौरान RTO के रीजनल इंस्पेक्टर संतोष यादव से भी पूछताछ की गई। एडीसीपी स्पेशल ऑपरेशन सुमित सुधाकर रामटेके ने उनसे बंद कमरे में जानकारी ली। वहीं, एआरटीओ आलोक कुमार की मौजूदगी में भी कार्यालय के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि कैश और दस्तावेजों के रिकॉर्ड में अंतर की वजह क्या है।
■ ड्रोन से निगरानी, बाहर के वेंडरों में भी मचा हड़कंप
छापेमारी के दौरान पुलिस ने ड्रोन के जरिए भी आसपास के इलाके पर नजर रखी। पुलिस की अचानक कार्रवाई को देखते हुए RTO के बाहर मौजूद कई अवैध वेंडर अपनी दुकानें बंद कर वहां से चले गए। कार्यालय के अंदर मौजूद कई कथित दलालों ने भी भागने की कोशिश की। पुलिस टीम ने पीछा कर 22 लोगों को पकड़ लिया, जबकि कुछ लोग मौके से फरार होने में सफल रहे। कार्रवाई के दौरान पुलिस और एक वकील के बीच कहासुनी होने की बात भी सामने आई। हालांकि, टीम ने जांच जारी रखी और कार्यालय में मौजूद रिकॉर्ड को खंगालने का काम पूरा किया।
■ CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड कब्जे में
SDM सदर अनुभव सिंह ने बताया कि जांच टीम ने पूरे RTO परिसर का निरीक्षण किया है। अधिकारियों ने जरूरी दस्तावेजों के साथ CCTV फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी कब्जे में लिए हैं, प्रारंभिक जांच में अलग-अलग स्थानों पर कैश के मिलान में अंतर सामने आने की बात कही गई है। कुछ जगहों पर 5 से 7 हजार रुपये और अन्य रकम में भी अंतर मिला है। इन सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया गया है।
■ आगे की जांच में खुलेगा पूरा नेटवर्क
करीब तीन घंटे चली कार्रवाई के बाद पकड़े गए 22 कथित दलालों को काकादेव थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। अब पुलिस उनसे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि वे RTO में किसके संपर्क में काम कर रहे थे और कार्यालय के किन कर्मचारियों से उनका संबंध था। प्रशासन का कहना है कि अभी जांच शुरुआती चरण में है। जब्त दस्तावेजों, CCTV फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और नकदी का मिलान किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि RTO में सामने आई कथित अनियमितताओं के पीछे कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ किस स्तर की कार्रवाई की जाएगी।
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