काबुल/इस्लामाबाद। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव अब पूर्ण युद्ध में बदल चुका है। पिछले कई दिनों से दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर आमने-सामने हैं, और अब हवाई हमलों के साथ संघर्ष और गहरा गया है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को एक बड़ा ऐलान किया कि अफगान वायुसेना ने पाकिस्तान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर सटीक और समन्वित हवाई हमले किए हैं। ये हमले पाकिस्तानी सेना की हालिया घुसपैठ और हवाई हमलों का जवाब बताए जा रहे हैं।
अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हमलों का मुख्य निशाना रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस रहा, जो पाकिस्तान वायुसेना का एक रणनीतिक कमांड और कंट्रोल सेंटर है। इसके अलावा बलूचिस्तान के क्वेटा में 12वीं डिवीजन मुख्यालय, खैबर पख्तूनख्वा की मोहमंद एजेंसी में ख्वाजाई कैंप और गुलनी सैन्य बेस पर भी बमबारी की गई। तालिबान के प्रवक्ताओं ने दावा किया है कि इन हमलों से पाकिस्तान के कई अन्य कमांड सेंटरों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ऑपरेशन में 203 मंसूरी, 201 सिलाब और 205 अल-बद्र कॉर्प्स ने हिस्सा लिया, जिसमें लेजर-गाइडेड हथियारों और आधुनिक ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
तालिबान का कहना है कि ये हमले पाकिस्तान द्वारा काबुल, कंधार और अन्य अफगान शहरों पर हाल के हवाई हमलों का सीधा बदला हैं। पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते काबुल और कंधार पर एयरस्ट्राइक की थीं, जिसके बाद अफगान सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। नूर खान एयरबेस पहले भी मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निशाना बना था, जहां इसके ढांचे को काफी क्षति पहुंची थी। अब तालिबान के हमलों से इस बेस को फिर से बड़ा झटका लगा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रात भर चले इन हमलों में 32 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि चार सैन्य चौकियां पूरी तरह तबाह हो गईं। अफगान सेना ने पाकिस्तान के दो सैन्य ड्रोन भी मार गिराए। डिप्टी प्रवक्ता सेदिकुल्लाह नसरत ने कहा कि नंगरहार, पक्तिया, खोस्त और कंधार प्रांतों में दुश्मन के खिलाफ आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। तालिबान ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने अफगान हवाई सीमा का उल्लंघन जारी रखा या कोई और आक्रामक कदम उठाया, तो और भी कड़ा जवाब दिया जाएगा।
इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में भारी तनाव पैदा कर दिया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ “ओपन वॉर” का ऐलान किया है और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। दोनों पक्षों के दावों में काफी अंतर है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है कि यह युद्ध और व्यापक हो सकता है, खासकर जब क्षेत्र पहले से ही ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष से प्रभावित है। सीमा पर तैनात सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति अभी भी अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है, और आने वाले घंटों में और घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।






