उत्तर प्रदेश

बंगाल हिंसा के विरोध में कानपुर में विहिप का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

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  • हिंसा पर जताई कड़ी नाराज़गी, कार्रवाई की मांग को लेकर राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
  • संगठन ने आरोप लगाया—बंगाल में हो रहे हिंदुओं पर हमले, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील
  • शांतिपूर्ण मार्च निकालकर विहिप ने प्रशासन को सौंपा विरोध पत्र, न्याय की लगाई गुहार
  • विहिप कार्यकर्ताओं ने कहा—बंगाल की घटनाएं लोकतंत्र पर हमला, राष्ट्रपति करें दखल
  • कानपुर में सड़कों पर उतरे विहिप कार्यकर्ता, बंगाल सरकार पर लगाया पक्षपात का आरोप

कानपुर : पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हुई भीषण सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में शनिवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेतृत्व में कानपुर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। विहिप कार्यकर्ताओं और संत समाज की अगुवाई में सैकड़ों की संख्या में हिंदू समाज के लोग सरसैया घाट स्थित श्रीराम जानकी मंदिर पर एकत्रित हुए और वहां से पदयात्रा करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन के दौरान बंगाल सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और हिंसा में मारे गए हिंदुओं को श्रद्धांजलि दी गई। विहिप के प्रांत अध्यक्ष राजीव महाना ने कहा कि बंगाल में वक्फ कानून के विरोध की आड़ में सुनियोजित रूप से हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। “मुर्शिदाबाद से शुरू हुई यह हिंसा अब पूरे बंगाल में फैल चुकी है। घर जलाए जा रहे हैं, दुकानें लूटी जा रही हैं, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है। यह सिर्फ हिंसा नहीं, बल्कि हिंदू समाज को दबाने और खत्म करने की साजिश है,”


वक्फ कानून बना बहाना : विहिप प्रांत मंत्री श्री राजू पोरवाल ने कहा कि 11 अप्रैल को मुस्लिम समुदाय की भीड़ ने वक्फ कानून के विरोध के नाम पर जो हिंसा की, वह न केवल असंवैधानिक थी, बल्कि हिंदू समाज पर सीधा हमला थी। “यह कानून संसद में बना है, हिंदुओं का इससे कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद 200 से अधिक घरों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया, तीन हिंदुओं की हत्या की गई, सैकड़ों को घायल किया गया और महिलाओं के साथ गंभीर अमानवीय कृत्य किए गए। 500 से अधिक परिवारों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा,” उन्होंने कहा।


ममता सरकार पर गंभीर आरोप : विहिप नेताओं ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह दंगाइयों के साथ खड़ी हैं। “एक इमाम, जिसने हिंसा से पहले ममता सरकार को धमकी दी थी, उसी से मुख्यमंत्री बाद में मुलाकात करती हैं। ये सब दिखाता है कि राज्य सरकार का झुकाव किस ओर है,” राजू पोरवाल ने कहा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे और बंगाल की कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में ले।


प्रदर्शन के माध्यम से विहिप की ये थी मांगे मांगें ?

  1. बंगाल में तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए।
  2. हिंसा की जांच NIA से कराई जाए।
  3. केंद्रीय सुरक्षा बलों को कानून व्यवस्था का नियंत्रण सौंपा जाए।
  4. बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से निष्कासित किया जाए।
  5. भारत-बांग्लादेश सीमा पर अविलंब तारबंदी कराई जाए।

प्रदर्शन में बड़ी भागीदारी : आंदोलन में संत रामानंद जी महाराज (दंडी आश्रम), गोल्डन बाबा जी, जया दीदी, गोविंददास जी, विवेक द्विवेदी, रामगोपाल द्विवेदी, अमरनाथ (बजरंग दल), नरेश तोमर, आशीष गुप्ता, आशीष त्रिपाठी सहित अनेक विहिप व बजरंग दल पदाधिकारी और सैकड़ों की संख्या में आमजन शामिल हुए।

विभाग मंत्री गौरांग जी ने कार्यक्रम का संचालन किया और कहा कि यदि शीघ्र सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह हिंसा केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहेगी।


 

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