

रिपोर्ट : दीपक कुमार : संवाददाता कानपुर
कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर में प्रॉपर्टी डीलर प्रदीप तिवारी द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ अपशब्दों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के विरोध में संत समाज ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को संत गोल्डन बाबा (मनोजानंद) के नेतृत्व में कई संतों ने डीएम कार्यालय पहुंचकर प्रदीप तिवारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया।
दरअसल, कुछ दिन पहले प्रदीप तिवारी का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने एक युवक से फोन पर विवाद के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिलाधिकारी (डीएम), और अन्य अधिकारियों के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की थीं। इस ऑडियो के वायरल होने के बाद कानपुर कमिश्नरेट पुलिस में हड़कंप मच गया। पुलिस ने सर्विलांस और अन्य तकनीकों की मदद से चकेरी निवासी प्रदीप तिवारी को तत्काल गिरफ्तार कर लिया।
इस मामले ने अब सियासी और सामाजिक रंग ले लिया है। संत गोल्डन बाबा ने प्रदीप तिवारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर एक मुहिम छेड़ दी है। उन्होंने पुलिस कमिश्नर, बीजेपी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और डीएम को पत्र सौंपकर प्रदीप तिवारी की संपत्ति की जांच और उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। गोल्डन बाबा ने मीडिया से बातचीत में कहा, “प्रदीप तिवारी ने मुख्यमंत्री और अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की हैं, जो निंदनीय है। हम मांग करते हैं कि उसकी संपत्ति की जांच हो और कड़ी कार्रवाई की जाए। जब तक न्याय नहीं मिलता, हमारा अनशन जारी रहेगा।”
संत समाज के इस अनशन और विरोध प्रदर्शन ने कानपुर में सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोगों और बीजेपी समर्थकों ने भी इस मुद्दे पर प्रदीप तिवारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो में प्रदीप तिवारी द्वारा एक दिल्ली के व्यापारी को धमकी देने की बात भी सामने आई है, जिसमें उसने कहा, “कानपुर आया तो जिंदगी तबाह कर दूंगा।” इस घटना ने प्रदीप तिवारी की दबंगई को उजागर किया है।
पुलिस ने प्रदीप तिवारी को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन संत गोल्डन बाबा और उनके समर्थक इस मामले में और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रदीप की संपत्तियों की जांच और उसके कथित अवैध कारोबार पर नकेल कसने की जरूरत है। इस पूरे मामले ने कानपुर की सियासत और प्रशासन को गरमा दिया है। अब सबकी नजरें शासन और पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या प्रदीप तिवारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी, या यह मामला और तूल पकड़ेगा, यह देखना बाकी है।