एटा : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुलिस सेवा में सराहनीय योगदान और उल्लेखनीय कार्यों के लिए एटा की एसओजी टीम से जुड़े प्रभारी श्रवण कुमार निगम को सम्मानित किया गया। आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक एसके भगत ने उन्हें पुलिस महानिदेशक का प्रशंसा चिन्ह सिल्वर मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। पुलिस विभाग में उत्कृष्ट एवं जिम्मेदारीपूर्ण कार्य के लिए मिलने वाला यह सम्मान श्रवण कुमार निगम की सेवा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सम्मान समारोह के दौरान एडीजी एसके भगत ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यों की सराहना करते हुए कर्तव्य के प्रति समर्पण को पुलिस सेवा की सबसे बड़ी ताकत बताया। इसी क्रम में श्रवण कुमार निगम को भी उनके सराहनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने के बाद पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भी उत्साह देखने को मिला।
एसओजी की जिम्मेदारी के दौरान कई अहम कार्रवाई
श्रवण कुमार निगम एटा में एसओजी/स्वाट टीम से जुड़े रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड और पूर्व में प्रकाशित खबरों के अनुसार उनकी टीम ने जिले में चोरी, अवैध हथियार और अन्य आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ कई अभियानों में कार्रवाई की है। जनवरी 2024 की एक कार्रवाई में स्वाट टीम प्रभारी श्रवण कुमार निगम की टीम ने थाना जैथरा पुलिस और अन्य टीमों के साथ मिलकर सोलर प्लेट चोरी के मामले में कार्रवाई की थी। इस दौरान आठ आरोपियों को पकड़ा गया था और चोरी की गई सोलर प्लेटें बरामद की गई थीं, इसी तरह अक्टूबर 2025 में एटा के परौली गांव के जंगल में चल रही कथित अवैध शस्त्र फैक्टरी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई में भी एसओजी प्रभारी श्रवण कुमार निगम की टीम शामिल रही थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ तमंचे और हथियार बनाने के उपकरण बरामद किए थे।
अपराधियों पर शिकंजा कसने में निभाई अहम भूमिका
एसओजी और स्वाट जैसी टीमें जिले में होने वाले गंभीर अपराधों की जांच, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और अपराधियों की धरपकड़ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे अभियानों में पुलिस टीम को लगातार फील्ड में सक्रिय रहना पड़ता है। तकनीकी इनपुट, मुखबिर तंत्र और जमीनी स्तर पर जुटाई गई जानकारी के आधार पर कार्रवाई को अंजाम दिया जाता है। श्रवण कुमार निगम के नेतृत्व में टीम की कई कार्रवाइयों का जिक्र स्थानीय समाचार रिपोर्टों में भी सामने आया है। जुलाई 2022 में जसरथपुर थाना क्षेत्र में एक हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस टीम के साथ हुई घटना में भी तत्कालीन थाना प्रभारी श्रवण कुमार निगम का बयान प्रकाशित हुआ था। उस मामले में पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान से बढ़ा मनोबल
पुलिस सेवा में सम्मान का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिसकर्मियों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए जाने वाले ऐसे सम्मान पुलिसकर्मियों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ अन्य कर्मचारियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। श्रवण कुमार निगम को मिला सिल्वर मेडल और प्रशस्ति पत्र भी इसी भावना को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। सम्मान मिलने के बाद उनके सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी। विभागीय स्तर पर भी इसे उनके कार्यों की सराहना के रूप में देखा जा रहा है।
टीमवर्क को माना जाता है सफलता की कुंजी
एसओजी और स्वाट की कार्रवाई किसी एक अधिकारी के प्रयास से पूरी नहीं होती। इसमें पुलिसकर्मियों, सर्विलांस टीम, स्थानीय थाना पुलिस और अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होता है। अपराधियों की पहचान से लेकर उनकी गिरफ्तारी और बरामदगी तक पूरी टीम की भूमिका रहती है। ऐसे में प्रभारी अधिकारी का नेतृत्व और टीम को सही दिशा देना महत्वपूर्ण होता है। श्रवण कुमार निगम को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मिला प्रशंसा चिन्ह इसी जिम्मेदारीपूर्ण पुलिस सेवा को सम्मानित करने वाला अवसर है। पुलिस विभाग में ऐसे सम्मान से अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश मिलता है कि कर्तव्य के प्रति ईमानदारी, मेहनत और समर्पण को विभागीय स्तर पर पहचान दी जाती है।
सम्मान से पुलिस महकमे में उत्साह
एडीजी आगरा जोन एसके भगत द्वारा सम्मानित किए जाने के बाद पुलिस महकमे में इसे सकारात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। सिल्वर मेडल और प्रशस्ति पत्र प्राप्त करना श्रवण कुमार निगम के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि होने के साथ उनकी टीम के लिए भी उत्साह बढ़ाने वाला क्षण है। स्वतंत्रता दिवस पर हुए इस सम्मान ने एक बार फिर यह रेखांकित किया कि पुलिस सेवा में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना जरूरी है। एटा की एसओजी से जुड़े श्रवण कुमार निगम को मिला यह सम्मान उनके पुलिस सेवा के दौरान किए गए सराहनीय योगदान की पहचान के तौर पर सामने आया है।
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