उत्तर प्रदेश

कानपुर में 2800 साल पुराना ऐतिहासिक टीला फिर दरका, दो मकानों का हिस्सा गंगा में समाया, हजारों का सामान बहा, खतरे में कई परिवार और प्राचीन विरासत

जाजमऊ में बारिश और गंगा कटान से बढ़ा संकट, दोपहर 3 बजे खिसका टीले का हिस्सा; पांच किरायेदारों वाले मकान का स्टोर ढहा, लोगों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की

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KANPUR NEWS : जाजमऊ में गंगा किनारे स्थित करीब 2800 साल पुराना ऐतिहासिक टीला एक बार फिर दरक गया। शनिवार दोपहर करीब 3 बजे टीले का एक हिस्सा अचानक खिसकने से किनारे बने दो मकानों का हिस्सा गंगा में समा गया। हादसे में घरों में रखा हजारों रुपये का घरेलू सामान भी गंगा की तेज धारा में बह गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और टीले के आसपास रहने वाले परिवारों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बारिश और गंगा कटान के कारण टीले की जमीन लगातार कमजोर होती जा रही है। यदि समय रहते ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो कई अन्य मकान भी गंगा में समा सकते हैं।

मुख्तार के मकान का स्टोर गंगा में गिरा

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, टीले के बिल्कुल किनारे बने मुख्तार के मकान का स्टोर अचानक भरभराकर गंगा में गिर गया। स्टोर में मकान में रहने वाले किरायेदारों का घरेलू सामान रखा हुआ था। बताया गया कि मुख्तार के मकान में करीब पांच किरायेदार रहते हैं। हादसे के दौरान लल्ला और इलियास समेत अन्य लोगों का सामान गंगा की धारा में बह गया। देखते ही देखते घरेलू उपयोग का सामान पानी में समाता चला गया और लोग चाहकर भी उसे नहीं बचा सके।


पीछे की दीवार भी ढही, बढ़ा खतरा

टीले के खिसकने के कारण मुख्तार के मकान की पीछे की दीवार भी ढह गई है। इससे मकान की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आसपास रहने वाले लोगों को आशंका है कि कटान का सिलसिला जारी रहा तो पूरा मकान और अन्य भवन भी खतरे की जद में आ सकते हैं, घटना के बाद स्थानीय लोग सहमे हुए हैं। कई परिवारों का कहना है कि बारिश के दौरान टीला पहले भी कई बार दरक चुका है, लेकिन हर बार खतरे की चेतावनी के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया गया।

कई मकान पहले से खतरे की जद में

स्थानीय निवासियों की सबसे बड़ी चिंता टीले के लगातार हो रहे कटाव को लेकर है। लोगों का कहना है कि गंगा किनारे बसे कई मकान पहले से ही असुरक्षित स्थिति में हैं। जमीन में दरारें आने और किनारे के हिस्से खिसकने से लोगों को हर वक्त किसी बड़े हादसे का डर सता रहा है, निवासियों का आरोप है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अभी तक कटान रोकने के लिए कोई स्थायी और प्रभावी समाधान सामने नहीं आया है।

सिर्फ लोगों के घर नहीं, 2800 साल पुरानी विरासत भी संकट में

जाजमऊ का यह इलाका केवल आवासीय क्षेत्र नहीं, बल्कि कानपुर की प्राचीन ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। करीब 2800 वर्ष पुराने इस टीले का ऐतिहासिक महत्व बताया जाता है और इसे राजा ययाति की राजधानी से संबंधित क्षेत्र के रूप में भी देखा जाता है। ऐसे में टीले का लगातार कटाव दोहरी चिंता पैदा कर रहा है। एक तरफ यहां रहने वाले लोगों के मकान और जान-माल पर खतरा मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ कानपुर की महत्वपूर्ण प्राचीन विरासत भी धीरे-धीरे गंगा कटान की भेंट चढ़ने की आशंका है।

मकान खाली कराने के लिए चस्पा किए गए थे नोटिस

बताया जा रहा है कि प्रशासन की ओर से टीले के आसपास स्थित कई मकानों को खाली कराने के लिए पहले नोटिस भी चस्पा किए गए थे। इसके बावजूद क्षेत्र में कई परिवार अब भी रह रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ नोटिस जारी कर देने से समस्या खत्म नहीं होगी। जब तक प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और विस्थापन को लेकर ठोस व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक लोग असमंजस और भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं।

वैज्ञानिक जांच बाकी, सुरक्षा पर बड़ा सवाल

टीले की स्थिति और कटान के कारणों का वैज्ञानिक आकलन किए जाने की बात सामने आई है। एचआरआई/सैटेलाइट आधारित वैज्ञानिक जांच अभी पूरी होना बाकी बताई जा रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जांच कब पूरी होगी और उसके बाद टीले को बचाने तथा आसपास के लोगों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? तब तक लगातार बारिश और गंगा के बढ़ते कटाव के बीच यहां रहने वाले परिवारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी? फिलहाल शनिवार को हुए ताजा हादसे ने जाजमऊ के ऐतिहासिक टीले के संरक्षण और इसके आसपास बसे लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के सामने एक बार फिर बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

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Ashutosh Mishra "Rudra"

आशुतोष मिश्र 'रुद्र' पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री के साथ-साथ एलएलबी डिग्री धारक हैं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत वर्ष 2006 में पंजाब केसरी दिल्ली से हुई। इसके बाद दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट कानपुर, अमर उजाला प्रकाशन कानपुर में उप-सम्पादक के पद पर करीब आठ वर्ष सेवाएं दीं। अमर उजाला की ओर से वह उप्र राज्य सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से उन्हें अधिमान्य पत्रकार की उपाधि प्राप्त हुई। आशुतोष मिश्र 'रुद्र' वर्तमान में INDIA NEWS 24x7 डिजिटल में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। रुद्र नागरिक सुविधाओं और विकास से जुड़े विभागों में 'खोजी पत्रकारिता' के लिए विशेष तौर पर जाने जाते हैं। नगर निगम, विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार एवं कई चर्चित घोटालों का उन्होंने खबरों के माध्यम से पर्दाफाश किया है। स्पष्ट एवं निष्पक्ष लेखन के कारण वह पत्रकारिता क्षेत्र में विशेष रूप से जाने जाते हैं।

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