Delhi LokSabha News : कानपुर की धरती से निकली देशभक्ति की अमर रचना ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा’ अब राष्ट्रीय पहचान की दहलीज पर पहुंच गई है। कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने लोकसभा के वर्तमान सत्र में ‘राष्ट्रीय ध्वज गीत विधेयक, 2026’ नाम से प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है। विधेयक के जरिए इस लोकप्रिय झंडा गीत को भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज गीत का दर्जा देने की मांग की गई है।
सांसद रमेश अवस्थी की इस पहल को कानपुर की ऐतिहासिक राष्ट्रवादी विरासत को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस गीत के रचयिता श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ का नाम कानपुर की स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रवादी चेतना से गहराई से जुड़ा रहा है।
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से अलग होगी पहचान
प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की भूमिका में किसी तरह का बदलाव करना नहीं है। इसके बजाय तिरंगे के सम्मान और राष्ट्रीय गौरव से सीधे जुड़े इस ऐतिहासिक गीत को एक अलग और विशिष्ट आधिकारिक पहचान देने की मांग की गई है। विधेयक में राष्ट्रीय ध्वज गीत के लिए एक गरिमापूर्ण और मानकीकृत प्रोटोकॉल तैयार करने की भी परिकल्पना की गई है। इसके तहत राजकीय समारोहों, शैक्षणिक संस्थानों और राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में गीत के गायन और उपयोग को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में बनी देशभक्ति की आवाज
‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा’ लंबे समय से देश के प्रमुख राष्ट्रभक्ति गीतों में शामिल रहा है। श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ की इस रचना ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गीत ने तिरंगे को महज एक राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि स्वाभिमान, स्वतंत्रता, एकता और देशभक्ति की भावना से जोड़ने का काम किया। यही कारण है कि आज भी स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, तिरंगा यात्राओं और विभिन्न राष्ट्रीय आयोजनों में इसकी गूंज सुनाई देती है।
कानपुर की विरासत को राष्ट्रीय मंच
कानपुर को केवल औद्योगिक नगरी के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन, साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक चेतना के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। ऐसे में शहर की धरती से जुड़े इस गीत को राष्ट्रीय ध्वज गीत का दर्जा देने की मांग कानपुर की ऐतिहासिक विरासत को भी नई चर्चा के केंद्र में ले आई है। सांसद रमेश अवस्थी की पहल के बाद शहर में भी इसे लेकर उत्साह है। इसे श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ के योगदान और कानपुर की राष्ट्रवादी परंपरा के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।
अभी लंबी है संसदीय प्रक्रिया
हालांकि, विधेयक का लोकसभा में पेश होना इसे कानून बनने की अंतिम मंजिल नहीं है। चूंकि यह प्राइवेट मेंबर बिल है, इसलिए इसे आगे संसदीय चर्चा, विचार-विमर्श और निर्धारित प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। अंतिम निर्णय संसद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। यदि भविष्य में विधेयक को मंजूरी मिलती है और यह कानून का रूप लेता है, तो राष्ट्रीय ध्वज गीत के गायन और उपयोग के लिए औपचारिक प्रोटोकॉल तैयार किया जा सकता है। इससे सरकारी समारोहों, शिक्षण संस्थानों और राष्ट्रीय आयोजनों में इसके इस्तेमाल को संस्थागत पहचान मिलने की संभावना होगी।
अब संसद की चर्चा पर टिकी निगाहें
रमेश अवस्थी की पहल ने कानपुर से जुड़े एक ऐतिहासिक देशभक्ति गीत को स्थानीय चर्चा से निकालकर राष्ट्रीय विमर्श में ला दिया है। आने वाले समय में विधेयक पर होने वाली चर्चा में राष्ट्रीय प्रतीकों, स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और देशभक्ति की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी बहस संभव है।
एक गीत, एक तिरंगा और कानपुर की पहचान ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ की यही विरासत अब संसद के पटल पर है। इसे राष्ट्रीय ध्वज गीत का आधिकारिक दर्जा मिलेगा या नहीं, इसका फैसला आगे की संसदीय प्रक्रिया करेगी, लेकिन सांसद रमेश अवस्थी की पहल ने कानपुर की इस ऐतिहासिक रचना को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में जरूर ला दिया है।
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