नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर शुरू हुआ विवाद अब चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम की लड़ाई तक पहुंच गया है। पार्टी के मूल चुनाव चिह्न पर चुनाव आयोग के फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग पार्टी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ऐसे समय में यह विवाद और महत्वपूर्ण हो गया है, जब राज्य की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं।
28 साल पुराने चुनाव चिह्न को लेकर ममता ने उठाए सवाल
चुनाव आयोग ने एक दिन पहले ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाले मूल चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद ममता बनर्जी की ओर से इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि आयोग उनकी पार्टी के उस चुनाव चिह्न को कैसे फ्रीज कर सकता है, जो करीब 28 साल से TMC के पास है। उन्होंने कहा कि पार्टी न तो सिर झुकाएगी और न ही हार मानेगी, ममता ने TMC से अलग हुए नेताओं पर राजनीतिक हमला भी बोला। उन्होंने बागी नेताओं को BJP की ‘A-टीम’ बताया। यह ममता बनर्जी का राजनीतिक आरोप है।
आयोग ने दोनों गुटों को दिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न
पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दोनों गुटों के दावे के बीच चुनाव आयोग ने शुक्रवार को ममता बनर्जी के गुट के लिए ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया। आयोग के इस फैसले के बाद आगामी उपचुनाव में दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेंगे। यानी अब चुनावी मुकाबला सिर्फ दो विधानसभा सीटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे TMC के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में मतदान
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों सीटों पर TMC के दोनों गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट की ओर से नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउद्दीन शेख को उम्मीदवार बनाया गया है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार घोषित किया था। हालांकि, शुक्रवार को संचिता प्रधान ने नंदीग्राम से अपना नाम वापस ले लिया। अब दोनों सीटों पर चुनावी समीकरण और उम्मीदवारों की स्थिति पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।
विधानसभा से संसद तक टूट का दावा
TMC के भीतर हुई टूट का असर पार्टी की विधानसभा और संसद की संख्या पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC ने 80 सीटें जीती थीं। इनमें से 58 विधायक अलग गुट के साथ चले गए, जबकि ममता बनर्जी के गुट के पास 22 विधायक बचे होने का दावा किया गया है। लोकसभा में भी पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर टूट की बात सामने आई है। TMC के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 के अलग होने का दावा है। इसके मुताबिक, अब ममता बनर्जी के गुट के पास लोकसभा में 8 सांसद रह गए हैं। राज्यसभा में TMC के 13 सांसद थे। इनमें से दो सांसदों के इस्तीफे के बाद पार्टी के पास 11 राज्यसभा सांसद बचे होने की बात कही गई है।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दूसरी ओर, 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव की तैयारियां भी आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दो मोर्चों पर घटनाक्रम अहम रहेगा, एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में चुनाव चिह्न को लेकर कानूनी लड़ाई और दूसरी तरफ नंदीग्राम व रेजीनगर में दोनों गुटों का चुनावी मुकाबला। दोनों सीटों के परिणाम 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। इन नतीजों के बाद TMC के भीतर चल रहे विवाद की राजनीतिक तस्वीर को लेकर भी आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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