Khana Khazana : महंगाई का असर अब आम आदमी की रसोई के बजट पर भी साफ दिखाई देने लगा है। घर पर तैयार होने वाली खाने की थाली की लागत में जुलाई के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में शाकाहारी यानी वेज थाली की लागत पिछले साल के मुकाबले करीब 4 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, मांसाहारी यानी नॉन-वेज थाली की लागत में सालाना आधार पर करीब 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
वेज थाली की लागत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण प्याज की कीमतों में तेजी रही। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में प्याज के दाम सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत ज्यादा रहे। इसके अलावा खाद्य तेल की कीमतों में लगभग 11 प्रतिशत और रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन जरूरी चीजों के महंगे होने का सीधा असर घर में बनने वाले भोजन की कुल लागत पर पड़ा।
नॉन-वेज थाली पर चिकन की महंगाई का असर
नॉन-वेज थाली की लागत में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण प्याज और गैस के अलावा ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में आया उछाल भी रहा। जुलाई में ब्रॉयलर चिकन के दाम सालाना आधार पर करीब 14 प्रतिशत बढ़े। चूंकि नॉन-वेज थाली की कुल लागत में चिकन की हिस्सेदारी लगभग आधी होती है, इसलिए चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पूरी थाली की लागत पर पड़ा, प्याज की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। बाजार में पुराने और महंगे स्टॉक की सप्लाई के कारण प्याज के दाम पर दबाव बना रहा। इसके साथ ही महाराष्ट्र में मार्च और अप्रैल के दौरान हुई बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि ने फसल और भंडारण को नुकसान पहुंचाया। इसका असर सप्लाई पर पड़ा और कीमतों को मजबूती मिली।
आलू और टमाटर ने दी थोड़ी राहत
हालांकि, सभी सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई। जुलाई में आलू के दाम पिछले साल की तुलना में करीब 12 प्रतिशत नीचे रहे। बेहतर उत्पादन और खेती के रकबे में बढ़ोतरी को इसकी प्रमुख वजह माना गया है। वहीं, टमाटर की कीमतों में भी सालाना आधार पर करीब 2 प्रतिशत की कमी आई। टमाटर की कीमतों को नियंत्रित रखने में जुलाई के दौरान बाजार में बढ़ी आवक की अहम भूमिका रही। देरी से हुई बुवाई के बावजूद महीने में टमाटर की सप्लाई बेहतर रही, जिससे इसके दाम में बड़ी तेजी नहीं आई।
जून के मुकाबले भी वेज थाली हुई महंगी
मासिक आधार पर देखें तो जुलाई में वेज थाली की लागत जून की तुलना में करीब 2 प्रतिशत बढ़ी। इस दौरान प्याज की कीमतों में लगभग 23 प्रतिशत का उछाल आया, जबकि आलू के दाम करीब 4 प्रतिशत बढ़े। दूसरी ओर, टमाटर की कीमत में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट और कुछ अन्य खाद्य वस्तुओं के दाम स्थिर रहने से थाली की लागत में और बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई। वहीं, नॉन-वेज थाली की लागत जुलाई में जून के मुकाबले लगभग स्थिर रही। इसकी वजह ब्रॉयलर चिकन के दाम में करीब 2 प्रतिशत की मासिक कमी रही, जिसने दूसरी खाद्य वस्तुओं की बढ़ी कीमतों के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया।
कुल मिलाकर, जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि प्याज, खाद्य तेल, रसोई गैस और चिकन जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों में बदलाव का सीधा असर घरेलू भोजन के बजट पर पड़ रहा है। आने वाले महीनों में इन खाद्य वस्तुओं की सप्लाई और कीमतों का रुख यह तय करेगा कि आम परिवार की रसोई पर महंगाई का दबाव और कितना बढ़ता है।








