
रिपोर्ट : अनुराग श्रीवास्तव – कानपुर
कानपुर : ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कानपुर मेट्रो ने पूरे देश में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के भव्य समारोह में कानपुर मेट्रो के आईआईटी कानपुर स्टेशन को ऊर्जा संरक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट से नवाजा गया। यह सम्मान देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की गरिमामयी उपस्थिति में प्रदान किया गया, जिसने कानपुर शहर और पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का पल बना दिया।
यह पुरस्कार केंद्रीय विद्युत तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार को सौंपा। यह सम्मान मेट्रो स्टेशनों के संचालन में ऊर्जा की खपत को न्यूनतम स्तर पर रखने, आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग करने और सतत विकास के सिद्धांतों को अपनाने के लिए दिया गया है। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार ऊर्जा मंत्रालय के अधीन ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) द्वारा हर वर्ष प्रदान किए जाते हैं, ताकि उन संस्थानों को प्रोत्साहन मिले जो ऊर्जा बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में योगदान दे रहे हैं।

कानपुर मेट्रो में ऊर्जा बचत के लिए कई नवाचारी और आधुनिक तकनीकों को अपनाया गया है। मेट्रो ट्रेनों में रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम लगा है, जिससे ब्रेक लगाते समय उत्पन्न ऊर्जा को वापस ग्रिड में भेजा जाता है और दोबारा उपयोग किया जा सकता है। सभी स्टेशनों पर ऊर्जा कुशल एलईडी लाइटिंग, हाई-एफिशिएंसी एचवीएसी सिस्टम, स्मार्ट लिफ्ट और एस्केलेटर स्थापित किए गए हैं। एस्केलेटर में स्लो स्पीड मोड और स्लीप मोड की सुविधा है, जिससे बिना उपयोग के समय में बिजली की खपत न के बराबर हो जाती है। बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) के जरिए लाइटिंग और अन्य उपकरणों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाती है। स्टेशनों पर तापमान को इष्टतम स्तर पर बनाए रखने के लिए भी विशेष इंतजाम हैं, जिससे अनावश्यक कूलिंग या हीटिंग से बचत होती है।

यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के अथक परिश्रम का नतीजा है। उन्होंने बताया कि कानपुर मेट्रो न केवल यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सेवा प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी बखूबी निभा रही है। यह उपलब्धि साबित करती है कि आधुनिक तकनीक और सही प्रबंधन से बड़े स्तर पर ऊर्जा संरक्षण संभव है।







